राजस्थान पत्रिका: अमृतं जलम् अभियान
राजस्थान-पत्रिका के ‘अमृतं-जलम् अभियान’ के तहत मंगलवार को शिव कस्बे के प्राचीन व ऐतिहासिक मानसरोवर तालाब पर श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन हुआ।अभियान के दौरान लोगों ने तालाब में गंदगी को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। सहायक विकास अधिकारी कृष्ण कुमार माली ने तालाब संवारने में सहयोग का संकल्प लिया। माली ने कहा कि तालाब के गहरीकरण के साथ सौंदर्यीकरण के लिए भी नवीन कार्ययोजना बनाई जाएगी। पाल पर पौधरोपण किया जाएगा जिससे पूरा इलाका मनोरम हो सके। तालाब के अंदर नारियल, प्लास्टिक की थैलियां, पेड़ों की पत्तियां, बोतलों सहित अन्य कई प्रकार का कचरा पड़ा हुआ था, उसे लोगों ने बाहर निकाला।
पर्यावरण के प्रति भी हमारा फर्ज
राउमावि शिव के प्रधानाचार्य कमलकिशोर कुमावत ने कहा कि जल ही जीवन है और जल की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जल को लेकर अगले विश्वयुद्ध की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा के साथ-साथ हमारा पर्यावरण के प्रति भी कुछ फर्ज है। उसे निभाने से ही हम शुद्ध वायु में सांस ले पाएंगे। पूर्व उपसरपंच हीरानाथ स्वामी ने कहा कि यदि अभी भी हम लापरवाह रहे तो आने वाली पीढ़ी को प्राकृतिक संसाधनों के लिए बहुत तरसना पड़ेगा। उन्होने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना करते हुए जल की कमी का एहसास करें और जल बर्बाद न करने का संकल्प करें।
राजस्थान-पत्रिका के ‘अमृतं-जलम् अभियान’ के तहत मंगलवार को शिव कस्बे के प्राचीन व ऐतिहासिक मानसरोवर तालाब पर श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन हुआ।अभियान के दौरान लोगों ने तालाब में गंदगी को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। सहायक विकास अधिकारी कृष्ण कुमार माली ने तालाब संवारने में सहयोग का संकल्प लिया। माली ने कहा कि तालाब के गहरीकरण के साथ सौंदर्यीकरण के लिए भी नवीन कार्ययोजना बनाई जाएगी। पाल पर पौधरोपण किया जाएगा जिससे पूरा इलाका मनोरम हो सके। तालाब के अंदर नारियल, प्लास्टिक की थैलियां, पेड़ों की पत्तियां, बोतलों सहित अन्य कई प्रकार का कचरा पड़ा हुआ था, उसे लोगों ने बाहर निकाला।
पर्यावरण के प्रति भी हमारा फर्ज
राउमावि शिव के प्रधानाचार्य कमलकिशोर कुमावत ने कहा कि जल ही जीवन है और जल की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जल को लेकर अगले विश्वयुद्ध की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा के साथ-साथ हमारा पर्यावरण के प्रति भी कुछ फर्ज है। उसे निभाने से ही हम शुद्ध वायु में सांस ले पाएंगे। पूर्व उपसरपंच हीरानाथ स्वामी ने कहा कि यदि अभी भी हम लापरवाह रहे तो आने वाली पीढ़ी को प्राकृतिक संसाधनों के लिए बहुत तरसना पड़ेगा। उन्होने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना करते हुए जल की कमी का एहसास करें और जल बर्बाद न करने का संकल्प करें।
Category
🗞
News