• 2 days ago
हाल ही हमारे recent interview में हमारी बात Mewar के राजा श्रीजी हुजूर लक्ष्यराज सिंह Mewar से हुई बात चीत के दौरान उन्होंने हमसे काफी कुछ share किया जैसे की उन्होंने बताया की उनके माता - पिता से उन्होंने प्रजा के साथ सही व्यवहार करना और उनकी जरूरतों को पूरा करने की कला सीखी. उन्होंने बताया की फिल्मों और असल जिन्दगी के राजा में जमीन आसमान का अंतर होता है. फिल्मों में राजा को अत्याचारी और क्रूर दिखाया जाता है. Shreeji Huzur Lakshyaraj Singh ने बताय की उन्होंने films देखने का बहुत शौक है, इसलिए जब भी उनको परिवार के साथ या journey करते हुए समय मिलता है, वह film और web series देखते हैं. Mewar की rich परंपरा और Maharana Pratap के वीर culture के बारे में भी बात की और साथ ही उन्होंने हमसे Salman Khan की नई film 'Sikandar' के बारे में भी बात करते दिखेंगे.

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Transcript
00:00৫্लिमों के जो एक राजाओं को दिखाने कै, डर्शाने का जो एक shock
00:04और एक दिलत्शस्पि जो उनकी हुती है, देखने की और करनेकी
00:08मैं उमीद करता हूँ उसमें
00:10और आज की परमप्रा upstream जो जमीन औसमां का
00:13जो है वो फर्क रहा होगा
00:15आराना पुताप के आप वंशज हैं
00:17तो अब आज अगर मैं आप से पूछूं
00:19आगे का रास्ता जो है
00:21सबसे बड़ा चालेंज क्या लगता है
00:23कि ये जो है ये चुनौती
00:25अगर मैंने पार की तो
00:27मैं थोड़ा जस्टिस कर पाऊंगा
00:43वो बाहर आपकी नहीं है
00:45पर ये जो आपको 80 के धश्वों की फिल्मों
00:4790 की धश्वों की फिल्मों के अंदर
00:49जो दिखाया गया है कि राजा को जो है
00:51वो पूरे गाउंगे पर अत्याचार करने के
00:53अलावा किसी तरीके से और जाना नहीं जाता है
00:55तो एक मैंने वहाँ राजा देखे, और एक आप देखे तो वहाँ तो अच्छा आनुभव नहीं रहा था, यहां बहुत अच्छा आनुभव रहा था।
01:03सर, बच्चपन में जब हम हिंदुस्तान में पैदा होते हैं, तो कहीं ना कहीं महल, राजा, और ये हर लड़के और लड़की का एक, क्या कह सकते है, एक फैंटसी होती है, कि यार राजा कैसे होते होंगे, फिल्मों में ही देखते हैं, तो आज यहां City Palace में मैंने अटेंड कि
01:33और अब तक मैंने आपको यूट्यूब पे देखा था, टीवी चैनल्स पे देखा था,
01:37जीन्स टीशर्ट में इंटरव्यू देते हुए, और अब जो है एक डिफरेंट एक्स्पेरियेंस हमारे लिए भी रहा और जाहिर तौर पर,
01:46दो फिलिंगs मैं आपसे पूछना चाहूँगा, पहली तो जब होश संभाला, तो जाहिर है आप शाही परिवार का हिस्सा है, और वो फिलिंग और जो आज फिलिंग है, क्या, कैसे डिस्क्राइब करेंगे?
01:58देखें, आपने काफी सारे सवाल जो है, काफी सारी सोच जो है, सवाल में आपने पिरोए हैं, तो सबसे पहली बात तो ये कि मैं, एक चीज़ तो आपको ये सबसे पहले मैं बताना चाहता हूँ कि,
02:14देखें, अब ये बात करते करते जो है, वो देखें, जहण में आता है, कि अब पिठाजी नहीं रहे है, और, अब जब इस सोचके बारे में बात करते हैं या, वो खायाल मन में आता है,
02:40या वो बातें मन में गुन्जती हैं।
02:43तो सबसे पहली बात तो ये कि पिताजी ने और माताजी ने दोनों ने,
02:49कभी भी जो है वो सोच और सिखलाई जो दी और परवरिष जो दी,
02:56वो हम लोगों ने हमेशां उनसे देख कर जो है वो सीखा है।
03:00कभी भी ये मेशूस नहीं हुआ कि वो कौन थे,
03:04वो हमेशां से अपने कार्रियों से पहचाने गए, जाने गए,
03:08और हम लोगों को भी उन्होंने अपने आपका परिचाय अपने काम के माध्यम से दिया।
03:13पुत्र में जरूर उनका था, पर एक सोच, एक सीख,
03:18वो सबको एक जैसी देते थे।
03:21और वो ये थी कि जब वो खुद उस पद्धचिन्णों पर चलते थे,
03:24और उनकी सबसे बड़ी खासियत उनका अनुसाशन हुआ करता था।
03:27और वो हम देखकर ही सीखे, ईश्वर की और भगवान की अनुकमपा से कभी,
03:32ऐसा दोर, ऐसा वक्त नहीं आया, जहां उन्हें मुझे बैठ कर कुछ समझाने की जो है वो जरुवत पड़ी।
03:39खुशी की बात यही थी कि बैठ कर चर्चाएं अकसर तब करनी पड़ी,
03:42कि जब कौन से कॉलेज जाना चाते हो, जीवन में क्या करना चाते हो,
03:47इन विशयों के उपर ज़रूर हम लोगों ने पिता पुतर ने बैठ कर खुब चर्चाएं करी,
03:52पर भगवान की असीम कृपा से ऐसा कभी नहीं रहा कि उन्हें कुछ कहने के लिए मुझे जो है वो बिठाना पड़े।
03:59और दूसरा आपने जो कहा, कि जो फिलमों से आपने राजाओं को जाना है और पेचाना है,
04:06उमीद करता हूं, कि वो जो फिलमों के जो एक राजाओं को दिखाने का, और दर्शाने का जो एक शोक, और एक दिल्चस्पी,
04:15क्योंकि उसके अंदर ये रहता था कि कैसे एग राजा को एक अलग द्रिष्टी कोंड से दिखाया जाए और यहां पर मिवाड की 1500 साल से सेवा भाव की परंपरा रही है।
04:27अगर में मेरे पुरुखों के दो कदम ही अगर में उनके पदचिन्णों पर चल जाओंगा तो मैं अपने आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा।
04:37अगर में मेरे पुरुखों के दो कदम ही अगर में उनके पदचिन्णों पर चल जाओंगा तो मैं अपने आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा।
04:51अगर में आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा तो मैं अपने आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा।
05:21अगर में आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा तो मैं अपने आपको बड़ा सोभाकिशाली मानूंगा।
05:51पिताजी को में पूछना नाईंसाफी भी होगी. एक सबसे बड़ी चीज़ किसे बड़ा दोगे?
06:12अच्छा पिताजी से सबसे बड़ी चीज क्या सीखी, बहुत कुछ सीखा होगा, जायर एक चीज, शायद पूछना ना इनसाफी भी होगी, लेकिन कोई एक सबसे बड़ी चीज जो आपने सीखी हो, जो जीवन भर साथ रहेगी।
06:24मैंने जैसे कहा उनके लिए, और अबी भी मैं यह मांता हूं कि अनुसाशन जो उनका थानां, वो वचन के और अनुसाशन के दोनू से जो है, वो दुनिया चाहए इधर के उदर हो जाए, अपने अनुसाशन को वो नहीं छोडते थे, और अपने वचन को �
06:54वो बहुत सेवा भाव था।
06:57मुझे ऐसा नहीं लगा कि एक राजा जो है
07:00और उसके सामने प्रजा है।
07:02तो ये जो एक quality होती है
07:04क्योंकि हम लोग ये समझते हैं कि
07:07नहीं, राजा होंगे तो इसका मतलब वो बहुत वैसा होगा।
07:10ये फिल्मों का देन है।
07:12हाँ ।
07:13ये जो अफसर आपमे से, जो चीज आपमे से निकल कर आ रह रही है
07:16भार वो आपकी नहीं है, पर ये जो आपको
07:18अस्ति के डश भोकी फिल्मों में नबए की डशबो खी फिल्मों के अंदर
07:21जो दिखाया गया है कि राजा को जो है,
07:23वो पूरे गाँवके पर अत्याचार करने के अलावा किसी तरीके से और जाना नहीं जाता है।
07:28अगर वो गाँव का ठाकुर होगा, तो वो शराबी होना उसको बहुत ज़रूरी है।
07:32वो अत्याचार जब तक नहीं करेगा, तब तक कैसे गाँव का मुख्या कहलाएगा।
07:38वो कहर नहीं ढाएगा जब तक, वो फिल्म कैसे आगे बड़ेगी।
07:43तो ये सोच के देख के हम लोग बड़े हुए।
07:52हम लोगों ने कभी भी इस सोच को एक किसी अन्य दूसरे दुरिष्टी कौंट से कभी नहीं देखा।
07:59पर जैसे ही आप वीरशरो मनी महारना पृताब की बात करते हैं, मेवार के कुल की अगर आप बात करते हैं,
08:05मेवार की परंपराओं की आप बात करते हैं, जहां सोयम राजा वो एकलिंग जी हैं।
08:11तो इससे खुबसूरत भाव, तो आपका सवाल है, उसका राज इसी के अंदर है।
08:16क्योंकि यहां पे जितने भी लोग मेरे से पहले आएं, उन्होंने सबने सेवा करी हैं।
08:24सोयम को कभी राजा नहीं माना है, सेवक ही माना है।
08:28तो आपको हमारे खुण में भी वो सेवा भाव ही नज़र आएगी,
08:32वही 76 पीडियों से चलती हुई आ रही है।
08:38मैं आपको बताओं जब राजा साहब का थोड़े दिन पहले नहीं रहे थे,
08:41मैं उदेपूर में ही था, तो उस दिन हमें नहीं पता था,
08:45तो ये जब ख़बर आई, तो जितने भी लोगों से बात हुई,
08:48तो बहुत रिस्टेक्ट थी उनके मन में,
08:50कि आज हमारे राजा साहब का यह है, तो आज सब बंद रहेगा,
08:54तो वो जो चीज़ दिखी मुझे, वो नॉर्मली क्या होता है,
08:58कि जैसे कोई सरकारी छुट्टी होती है, तो लोग उसको इंजॉय करते हैं,
09:01लेकिन वहाँ जो एक भाव था, आधर भाव था, वो मैंने देखा,
09:05तो मैंने थोड़े दिन पहले उस चीज़ को फर्स्ट हैंड एकस्पेरियन्स किया,
09:08कि हाँ, उन लोगों के मन में एक आधर भाव है.
09:11अच्छा, आप खुद फिल्में देखते हैं, वक्त मिलता हैं, शौकीन हैं?
09:14बिल्कुल, बिल्कुल, मुझे फिल्मों का बिल्कुल शौक है, मुझे अच्छा लगता है,
09:18अकसर जो है लंबे सफर के ओपर जब कहीं जाना होता है,
09:22तब फिल्मों को देखने का मुझे मौका मिलता है,
09:25कही बार तब मैं फिल्मे देखने का प्रयास करता हूँ।
09:28वैसे मुझे डोक्यॉमेंटरी बहुत पसंद हैं।
09:30पर लंबे सफर पर कभी अगर दोस्तों के साथ जा रहे हैं।
09:33कही जा रहे हैं, परिवार के साथ जा रहे हैं।
09:35तो उस समय पे फिल्में देखने का मुझे शौक है।
09:37मेरे लिए तो अभी एक experience रहा कि
09:39अभी मैंने सिकंडर देखी सल्मान खान के,
09:40तो उसमें वो राजकोट के राजा बने थे।
09:42अच्छा।
09:42तो एक मैंने वहाँ राजा देखे और एक आप देखे,
09:46तो वहाँ तो अच्छा अनुभव नहीं रहा था।
09:49यहाँ बहुत अच्छा अनुभव रहा था।
09:51So, thank you so much, sir.
09:53हमारे लिए भी एक opportunity है
09:55कि City Palace में बैट के आप से बाचीत की
09:57और ये पूरा experience मिला।
09:59आपने वक्ष निकाला, आप आए चर्चा करें।
10:01कभी फिर बैठेंगे और लंबी चर्चा करेंगे
10:04क्योंकि आपके पास काफी सारे किस्से, कहाणिया
10:08और काफी जिंदगी का अनुभव है
10:09जो मैंने सुना है, उस्ट्रेलिया से लेकर
10:12और पूरे विश्व में आप घुमें
10:13क्रिकेट से लेकर और काफी कुछ किया है आप ने
10:16तो उम्मीद है कि इस गधी के साथ पूरा नियाय करेंगे
10:20और ऐसे ही रही हैं
10:21एकलिंग जी के आशीस और आशुर्वाद से
10:23बहुत आपार

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